हम तो पीते है ग़म भुलाने के लिए

कौन कम्बखत पीना चाहता है पीने के लिए,
हम तो पीते है ग़म भुलाने के लिए।

उसने कहा कि अब अपनी ज़िंदगी जियो तुम,
हम रोज निकल जाते है, मौत को बुलाने के लिए।

अब कहीं दिखायी, मालूम नहीं पड़ते,
वो जो त्यार थे , इश्क़ शहादत के लिए।

सुना है, उन्होंने मंदिर बदल लिया,
किसी ओर की करने, इबादत के लिए।

और कैसी नोबत आ गई है,
ये अधूरे इश्क़ वाले शायर के लिए।

कि अब उनको याद रखना पड़ता है,
उनको ही भुलाने के लिए।

Written – Gautam Rajpurohit

Treasure of words

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