
समंदर में डूबी कश्ती, पानी पर फिरसे चली है क्या,
सीली लकड़ियाँ भी कभी जली है क्या?
चाहे हो एक तरफा, चाहे दोनों तरफ़ से मुक्कमल हो,
मर्द को उसकी पसंदीदा औरत भी कभी मिली है क्या?
Written – Gautam Rajpurohit

समंदर में डूबी कश्ती, पानी पर फिरसे चली है क्या,
सीली लकड़ियाँ भी कभी जली है क्या?
चाहे हो एक तरफा, चाहे दोनों तरफ़ से मुक्कमल हो,
मर्द को उसकी पसंदीदा औरत भी कभी मिली है क्या?
Written – Gautam Rajpurohit